आवेदन आमंत्रित - सामाजिक कार्यकर्ता

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आवेदन की आखरी तारीख बढ़ा दी गई है – 30 मई 2026 तक आवेदन खुला रहेगा। 

संस्था के बारे में

पार्ट III – एक्शन रिसर्च एंड रिसोर्स सेंटर कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ कर, लोगों के अधिकारों और समाज में न्याय के लिए काम करता है। हमारा सपना है कि भारतीय संविधान के भाग III में लिखे गए मौलिक अधिकार हर किसी को मिलें। हम गरीब और पिछड़े लोगों, खासकर उन लोगों के साथ मिलकर काम करते हैं जिनके साथ जाति या पहचान के नाम पर नाइंसाफ़ी हुई है। हम उन्हें न्याय दिलाने, सम्मान से जीने और सरकारी विभागों को जवाबदेह बनाने के लिए कानून, ट्रेनिंग, खोजबीन, पैरवी और सरकारी संस्थानों से बातचीत करते हैं।

पार्ट III बस्ती के संगठनों, वकीलों और सरकारी विभागों के साथ मिलकर काम करता है ताकि लोगों को न्याय मिल सके और सरकारी कामकाज में जवाबदेही बनी रहे।

और जानने के लिए यहाँ जाएँ: www.part-three.org

प्रोजेक्ट के बारे में

पार्ट III बिहार में एक नया प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसका मकसद जाति के नाम पर हिंसा से पीड़ित लोगों की मदद करना और सरकारी सिस्टम को और मजबूत बनाना है ताकि वे पीड़ित लोगों की बेहतर मदद कर सकें। बिहार में आज भी जाति के आधार पर बहुत अत्याचार होते हैं, और यह प्रोजेक्ट उन दिक्कतों को दूर करने की कोशिश करेगा।

हम कई तरह से काम करेंगे, जैसे:

  • हिंसा से पीड़ित लोगों को कानूनी मदद और सरकारी सहायता दिलाना;
  • बस्तियों  में जाकर लोगों से मिलना और एक्शन रिसर्च करना, खासकर युवाओं और स्थानीय लोगों के साथ ताकि वे अपने समुदाय में बदलाव लाने में आगे आ सकें;
  • सरकार और कोर्ट में जाकर पीड़ितों के हक में बात करना और यह सुनिश्चित करना कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 जैसे खास कानून ठीक से लागू हों;
  • लोगों की बातों और जानकारी को इकट्ठा करना और रिसर्च करना ताकि पता चले कि सिस्टम में कहाँ कमी है और नीतियों में क्या बदलाव किए जा सकते हैं।

काम के बारे में

सामाजिक कार्यकर्ता को पिछड़े समुदाय के लोगो के साथ गहरे और लंबे समय तक रिश्ते बनाना और साथ ही, पार्ट III की कानूनी और रिसर्च टीम के साथ मिलकर काम करना होगा। इस काम में पीड़ितों की मदद करना, बस्तियों के स्तर पर लीडरशिप तैयार करना, स्थानीय स्तर पर लोगों के हक में आवाज दस्तावेजीकरण करना और पीड़ितों और न्याय दिलाने वाले सिस्टम के बीच तालमेल बिठाना शामिल है।

इस काम का एक जरूरी हिस्सा सरकारी अफसरों, पुलिस और अन्य स्टेकहोल्डर  के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करना भी होगा कि पीड़ितों को आसानी से न्याय मिले और सरकारी विभाग अपनी जिम्मेदारी समझें।

*यह पटना, बिहार में पूर्णकालिक काम की नौकरी है।

मुख्य काम

  • बस्ती और समुदाय में जाना और जाति के नाम पर होने वाली हिंसा के मामलों पर नज़र रखना, साथ ही पीड़ित परिवार और समुदाय के लोगों के साथ लगातार संपर्क में रहना।
  • पीड़ितों, उनके परिवारों और कानूनी टीम से बात करने फील्ड पर जाना, जानकारी जुटाना और रिपोर्ट लिखना।
  • पीड़ितों को कानूनी सलाह और केस से जुड़ी मदद देना ताकि वे पुलिस, कोर्ट और सरकारी मदद पाने के तरीकों को समझ सकें। इसमें पत्र लिखना, अर्जी देना, आरटीआई दाखिल करना और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग आदि जैसे निकायों में शिकायत करना शामिल है।
  • सरकारी अफसरों, जजों और पुलिस के साथ मिलकर ऐसे नियम और तरीके बनाने के लिए काम करना जिससे पीड़ितों को आसानी से न्याय मिले और सिस्टम में जो कमियाँ हैं, वे दूर हों।
  • जाति के नाम पर होने वाली हिंसा, उससे जुड़े कानूनों और सरकारी मदद में कहाँ कमी है, इस पर रिसर्च टीम और समुदाय के साथ मिलकर काम करना।
  • पटना में बस्ती और समुदाय के स्तर पर काम करने वाले लोगों और युवाओं का नेटवर्क बनाने में मदद करना और उनके साथ मिलकर काम करना ताकि एक्शन रिसर्च का काम ठीक से हो सके।
  • रिसर्च रिपोर्ट, पॉलिसी ब्रीफ और लोगों के हक में बात करने वाली सामग्री तैयार करने में मदद करना ताकि मामलों, सिस्टम की कमियों और क्या बदलाव होने चाहिए, यह सब लिखा जा सके।
  • युवाओं, समुदाय के लोगों और संगठनों के लिए ट्रेनिंग के सेशन आयोजित करना ताकि वे अपने इलाके में सामाजिक न्याय के लिए आवाज उठा सकें।
  • गाँव के संगठनों और न्याय दिलाने वाले सरकारी सिस्टम के बीच अच्छा तालमेल बनाना ताकि पीड़ितों को पूरी और लगातार मदद मिल सके।
  • गाँव में जागरूकता फैलाने वाले अभियान और सरकारी विभागों और अदालतों के साथ मीटिंग आयोजित करने में मदद करना ताकि सिस्टम में बदलाव आए।
  • संगठन के अंदर के काम में मदद करना, जैसे मीटिंग, वर्कशॉप, फील्ड रिपोर्टिंग और प्रोजेक्ट के कागजात तैयार करना।

ज़रूरी योग्यताएँ

  • सामाजिक कार्य, लोगों को इकट्ठा करके काम करना, केस देखना या लोगों के हक में आवाज उठाने के काम का अनुभव।
  • मानवाधिकारों, सामाजिक न्याय, लोगों के साथ मिलकर काम करने और दलित समुदायों और पहचान के नाम पर हिंसा झेलने वाले लोगों की दिक्कतों को समझने और उनमें रुचि रखने वाला।
  • फील्ड पर जाकर गहराई से काम करने की इच्छा और क्षमता।
  • अच्छी बातचीत करने और काम को व्यवस्थित करने की क्षमता।
  • हिंदी और अंग्रेजी पढ़ना, लिखना और समझना फायदेमंद है।
  • महिला, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के और पटना के निवासी उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

काम करने की जगह और समय

यह पटना, बिहार में पूर्णकालिक काम करने की नौकरी है। ज़्यादातर काम पटना जिले में फील्ड पर होगा, और कभी-कभी आसपास के इलाकों में भी जाना पड़ सकता है। शुरू में एक साल का कॉन्ट्रैक्ट होगा, जिसमें तीन महीने का परिवीक्षा होगा। आगे काम कैसा होता है और प्रोजेक्ट की ज़रूरत के हिसाब से कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाया जायेगा ।

आवेदन कैसे करें

इच्छुक उम्मीदवार नीचे दी गई चीजें जमा करें:

  • अपना बायोडाटा (सीवी)
  • आप यह नौकरी क्यों करना चाहते हैं, इसका एक पत्र (एसओपी)
  • आप नीचे दिए गए आवेदन फॉर्म के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। या हमें अपना आवेदन  [email protected] पर मेल करें। 

अंतिम तारीख

आवेदन 30 मई 2026 तक खुला है। आवेदनों की समीक्षा लगातार की जाएगी, और पार्ट III अंतिम तारीख से पहले भी किसी को नौकरी का प्रस्ताव दे सकता है।

वेतन

सैलरी उम्मीदवार की पढ़ाई-लिखाई और अनुभव के हिसाब से होगी, जो लगभग ₹240000 से ₹ 300000 प्रति वर्ष के बीच होगी।

समान अवसर

पार्ट III सभी को समान अवसर देता है और सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों से आवेदन करने के लिए ज़ोर देता है।